जून के तीसरे सप्ताह में भी मानसून देश के बड़े हिस्से को कवर नहीं कर पाया है। 17 जून की सुबह ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक के ऊपर मानसूनी बादल नहीं हैं। इन राज्यों में आसमान साफ दिख रहा है।
मौसम विभाग के मुताबिक, देश के 723 जिलों में से सिर्फ 103 में ही सामान्य बारिश हुई है। यानी, देश के 40% हिस्से में सामान्य से कम बारिश हुई है। इसकी मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी में मजबूत लो-प्रेशर एरिया का न बनना है।
4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद मानसून 13 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है। पिछले 7 दिन से यह तेलंगाना के भद्राचलम में अटका हुआ है। इसी वजह से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बारिश में देरी हो गई है।
मानसूनी बारिश भले ही न हुई हो, लेकिन प्री-मॉनसून एक्टिविटीज और लोकल सिस्टम्स की वजह से देश के अधिकांश राज्यों में पारा 40°C या इससे नीचे बना हुआ है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा में हीटवेव से राहत मिली है। नीचे मैप में देखिए देशभर में पारे की चाल…
मौसम विभाग के मुताबिक, जेट स्ट्रीम का मौजूदा पैटर्न कमजोर होने पर मानसूनी हवाएं तेज होंगी। अगले 4-5 दिनों में मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने की परिस्थितियां बन सकती हैं।
जेट स्ट्रीम वायुमंडल की ऊपरी परतों में बहने वाली अत्यंत तेज हवाएं हैं। ये आमतौर पर पृथ्वी की सतह से करीब 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई होती है। ये मानसूनी बादलों और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ को प्रभावित करती हैं।
राजस्थान में प्री-मानसून की बारिश से गर्मी कम हो गई है। बुधवार को भी 23 जिलों में आंधी-बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने राज्य में अगले तीन दिन इसी तरह का मौसम रहने का अनुमान जताया है। बीकानेर, जयपुर, अजमेर, भरतपुर और कोटा संभाग के जिलों के लिए आंधी-बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री अब 21 से 23 जून के बीच होने का अनुमान है। IMD (मौसम केंद्र) की माने तो तेलंगाना के भद्राचलम में मानसून एक सप्ताह से अटका हुआ है। इस वजह से एमपी के साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में यह लेट हो गया है।


