केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने 1947 में भारत को मिली आजादी को असली आजादी मानने से इंकार कर दिया था। उस वक्त पार्टी का कहना था कि यह आजादी अधूरी और समझौतों का परिणाम है, जिसे उन्होंने ‘झूठी आजादी’ का नाम दिया। इस हकीकत को पूरी तरह स्वीकार करने में पार्टी को 5 साल से ज्यादा का समय लग गया।
मार्च 1948 में पार्टी के भीतर एक बड़ा बदलाव हुआ। पीसी. जोशी की जगह बीटी. रणदिवे (BTR) नए जनरल सेक्रेटरी बने। उनके आते ही पार्टी में ‘रणदिवे लाइन’ लागू हुई, जो बेहद कट्टर और आक्रामक थी। इसी सोच के तहत जनवरी 1950 में संविधान लागू होने से पहले ही CPI ने इसका विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस के नेता भारतीय जनता पर ‘गुलामी का संविधान’ थोप रहे हैं।
लेफ्ट पार्टी ने नेहरू सरकार को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। 1948 और 1949 के दौरान यह नीति पूरी तरह विफल रही। इसके बाद मई-जून 1950 में बीटी. रणदिवे को पद से हटा दिया गया।
पार्टी की सेंट्रल कमेटी ने यह स्वीकार किया कि बिना सोचे-समझे 9 मार्च 1949 को देशव्यापी हड़ताल और विद्रोह का जो आह्वान किया गया था, वह बड़ी भूल थी। करीब 6 साल के बाद CPI अपनी कट्टर विचारधारा छोड़कर देश की आजादी की सच्चाई स्वीकार करने के लिए मजबूर हुई।


