केंद्रीय कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार संसद के अगले सत्र में इससे जुड़ा विधेयक पेश करेगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल चीफ जस्टिस समेत 33 जजों की तय संख्या है। सरकार इसमें चार नए जज जोड़ना चाहती है। इसके लिए संसद के अगले सत्र में बिल लाया जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद 1956 के कानून में संशोधन किया जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का अधिकार संसद के पास है। कानून लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम नए जजों के नाम सरकार को भेजेगा।
इससे पहले 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। वहीं, 2008 में जजों की संख्या 26 से बढ़कर 31 हुई थी। शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों की व्यवस्था थी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दो पद खाली हैं। जस्टिस बी.आर. गवई नवंबर 2025 में और जस्टिस राजेश बिंदल अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे।
आने वाले महीनों में सुप्रीम कोर्ट में तीन और पद खाली होने वाले हैं। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस पंकज मित्तल जून 2026 में रिटायर होंगे, जबकि जस्टिस संजय करोल अगस्त 2026 में सेवानिवृत्त होंगे।
संविधान के अनुच्छेद 124(3) के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का जज वही बन सकता है जो भारतीय नागरिक हो। इसके लिए व्यक्ति का कम से कम पांच साल तक हाईकोर्ट में जज रहना या 10 साल तक वकील के तौर पर काम करना जरूरी है। किसी प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ को भी सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा सकता है।


