मानसून केरलम पहुंच गया है। अगले 2-3 दिन यह गोवा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु को कवर कर सकता है। वहीं, बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में आगे बढ़ सकता है।
मौसम विभाग के मुताबिक, केरलम, तमिलनाडु और कर्नाटक में अगले 7 दिन में कुछ जगह भारी बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में प्री मानसून एक्टिविटी के असर से आंधी-बारिश देखने मिल सकती है।
इस बार मानसून 3 दिन लेट है। आमतौर पर यह 1 जून को केरलम पहुंचता है। इसके बाद डेढ़ महीने में पूरे देश को कवर कर लेता है। 17 सितंबर के आसपास राजस्थान के रास्ते वापसी शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरा हो जाता है।
वहीं दिल्ली-NCR के कई इलाकों में गुरुवार दोपहर को अंधेरा छा गया और तेज बारिश हुई। फिल्म सिटी में आंधी के बाद कई पेड़ टूटकर कारों पर गिर गए। सड़कों पर पानी भर गया जिससे ट्रैफिक जाम लग गया।
मौसम विभाग (IMD) ने ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और तेलंगाना समेत 24 राज्यों में बारिश, आंधी और तेज हवाओं की संभावना जताई है। वहीं राजस्थान, हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बारिश, ओले गिरने और तेज हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में भी दो दिन के लिए यलो अलर्ट है।
क्यूम्युलोनिम्बस क्लाउड्स यहां 50 से 70kmph की रफ्तार से आंधी-बारिश करवा सकते हैं। क्यूम्युलोनिम्बस क्लाउड या CB क्लाउड (बादल) मौसम के पावरहाउस माने जाते हैं। तेज आंधी, बिजली और गरज वाले तूफान इन्हीं बादलों के कारण बनते हैं।
कल से केरलम के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश हो रही है, जिसके चलते IMD ने अलप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों के लिए 3 घंटे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऑरेंज अलर्ट का मतलब है 11cm से 20cm तक की बहुत भारी बारिश हो सकती है।
देश के कई राज्यों में अभी भी गर्मी कम नहीं हुई है। गुजरात, पश्चिमी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में तापमान 40°C से ऊपर बना हुआ है।
गर्मियों में स्किन टैनिंग एक कॉमन प्रॉब्लम है। ज्यादा सन लाइट एक्सपोजर में UV (अल्ट्रावायलेट) रेज से स्किन टैन हो सकती है। मामूली दिखने वाली टैनिंग कई बार मेलानोमा जैसे स्किन कैंसर का रिस्क बढ़ा सकती है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि- स्किन टैनिंग क्या है, किन लोगों में इसका रिस्क ज्यादा है और इससे बचाव के लिए क्या करेंमानसून की लेट-लतीफी पिछले कई सालों से जारी है। पिछले 13 साल में यह 7वीं बार है जब मानसून लेट हुआ है। IMD के आंकड़ों के मुताबिक बीते 150 साल में मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरलम पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरलम पहुंचा था।


