सीबीएसई ने 19 मई से आंसर-शीट की स्कैन कॉपी के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की। इसकी लास्ट डेट 23 मई तय की गई थी, लेकिन तकनीकी खामियों से चलते वेबसाइट पिछले 5 दिनों से लगातार क्रैश हो रही है।
बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह ने कहा था कि वेबसाइट पर बिना अधिकार दखल अंदाजी के प्रयास हुए, इसलिए छात्रों की असुविधा को देखते हुए बोर्ड ने आंसर-शीट की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 23 मई से बढ़ाकर 24 मई की है।
अब आज आवेदन की लास्ट डेट है, लेकिन वेबसाइट लोड ही नहीं हो पा रही। सीबीएसई ने बताया है कि इस साल ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से करीब 98 लाख 60 हजार कॉपियां जांची गईं हैं। इस बार कुल 17.68 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी।
इधर री-इवैल्युएशन के लिए शुरुआती 3 घंटे में ही करीब 1.26 लाख आवेदन आए थे। सीबीएसई बोर्ड ने अब इसका डेटा ही अपडेट करना बंद कर दिया है। देश के इतिहास में संभवत: पहली बार है, जब किसी बड़ी परीक्षा में कॉपी दोबारा जंचवाने के लिए आवेदन करने वाले 7% से ज्यादा हैं। पिछले सालों पर नजर डालें तो ये आंकड़ा 2-3% होता था।
दैनिक भास्कर के सूत्र के मुताबिक, अगर साइट खुल भी जाए, तो एक स्टेप बढ़ने के लिए पेज को कम से कम 10 बार रिफ्रेश करना पड़ रहा है।वहीं, जिन छात्रों ने 3-4 दिन पहले आवेदन किया था, उन्हें न तो अभी तक कॉपी मिली और न ही मेल या टेक्स्ट के जरिए कोई जानकारी दी गई।
वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सर्वर डाउन, पेमेंट फेल होने और धुंधले पन्नों जैसी तकनीकी दिक्कतों पर संज्ञान लिया। उन्होंने बोर्ड से जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
इधर, कुछ छात्रों को शनिवार सुबह 11.30 बजे पेमेंट सफल होने और एप्लीकेशन सबमिट होने का मैसेज मिला, शाम 6.45 बजे अचानक मैसेज आया कि उनके पैसे रिफंड कर दिए गए हैं और आवेदन सबमिट ही नहीं हुआ।
स्टूडेंट इस बात से परेशान हैं कि अगर समय पर कॉपी नहीं मिली, तो वे अपनी कॉपियों के री-इवैल्युएशन के लिए समय पर आवेदन कैसे कर पाएंगे।
सर्वर ठप होने और छात्रों की इस परेशानी के बीच सोशल मीडिया पर एक फर्जी सर्कुलर भी तेजी से वायरल हो रहा है। 23 मई की तारीख वाले इस सर्कुलर में दावा किया गया है कि तकनीकी दिक्कतों से 2026 की री-इवैल्युएशन और स्कैन कॉपी प्राप्त करने की प्रक्रिया रद्द कर दी गई है।
इसमें यह भी अफवाह फैलाई गई है कि छात्रों द्वारा जमा फीस 15 कार्य दिवसों के भीतर रिफंड कर दी जाएगी और उनके पुराने नंबर ही अंतिम (फाइनल) माने जाएंगे। सीबीएसई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट किया है कि यह सर्कुलर पूरी तरह फर्जी है।


